गांव के रास्ते - टेढ़े और सस्ते - 1
गांव " शब्द सुनते ही मन में एक ही विचार आता है - पिछड़ा स्थान । कच्चे घर , दुबले शरीर , अनपढ़ लोग , पशुओ की दुर्गन्ध । यहीं सब आएगा न आपके मन में या आपके पवित्र विचारों में । तो आप बिल्कुल भी सही नहीं हैं , हाँ यह सच है गांव बदल चुके हैं ।
लेकिन गांव में आज भी शांति और सम्रद्धि हैं , गांव में आज भी सभ्य प्रेम रहता हैं , गांव में आज भी सुंदरता बसती हैं , गोधूलि शाम भी ऐसे ही होती है और छोटे - छोटे त्यौहार भी बड़प्पन से मनाएं जाते हैं , कोई बैर भाव नहीं , केवल सद्भाव । गांव के लोगों ने ऐसे मुखोटे नहीं पहन रखे हैं जिससे शहरी लोगों ने अपने मुँह को ढँक रखा हैं । दिखावा इन्हें नहीं आता , जैसे दिखते हैं अंदर से भी वैसे ही हैं । इन्हें तो बस प्यार जताना आता है ,यहाँ बड़ा हॉस्पिटल नहीं है ..क्योंकि यहाँ के लोगों को इसकी जरुरत ही नहीं पड़ती । यहाँ एअरपोर्ट भी नहीं है क्योंकि यहाँ के लोगों के पास खूब सारा समय है । सुविधाओं के नाम पर यहां - बड़े बड़े खेत है जहां खूब अनाज उगाया जाता है । गाय और भैस का शुद्ध दूध है । जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियां है । बावड़ी से निकाला गया शुद्ध ,पवित्र और मीठा पानी हैं । एक छोटा स्कुल है जहां बच्चे मन लगाकर पढ़ते है । छोटे - छोटे मंदिर है कई सारे । बहुत सारे पेड़ - पौधे ।
आगे जारी है ....