शनिवार, 23 जनवरी 2016

कविता - मैं और तुम 

बरसात हुई थी 
फूल खिले थे 
जब हम मिले थे ।

कोयल बोली थी
मोर नाचे थे 
जब हम मिले थे ।

कस्मे खाई थी 
वादे किए थे 
जब हम मिले थे ।

फिर....

कमरा बांटा
किचन बांटा 
सपने बांटे 
बर्तन बांटे 
बिजलियाँ कड़की 
बादल गरजे .
और फिर 
..जिंदगी खत्म ।