एक कविता :- वो छोटी लड़की
वो छोटी सी लड़की
जिसे मैं हर रोज
देखता हूँ ,
सामने वाली गली में
उन प्लास्टिक की थैलियों
के बीच ,
घर से फेंकी हुई
बेकार चीजों के बीच
कुछ ना कुछ खोजते हुए
उन्ही मैले - कुचले अध् फटे
कपड़ो में ।
एक बार जब मैंने झाँका
उसकी आँखों में
मुझे दिखे ,
हजारों रंग बिरंगे सपने
तितली से प्यारे
हाथ में बस्ता लिए
पढ़ने के सपने
डॉक्टर बनने के सपने
आधे - अधूरे हजारो सपने
काश ! भारत जल्द स्मार्ट देश बने
उस छोटी सी लड़की के लिए ।
Copyright@ Abhimanyu singh
वो छोटी सी लड़की
जिसे मैं हर रोज
देखता हूँ ,
सामने वाली गली में
उन प्लास्टिक की थैलियों
के बीच ,
घर से फेंकी हुई
बेकार चीजों के बीच
कुछ ना कुछ खोजते हुए
उन्ही मैले - कुचले अध् फटे
कपड़ो में ।
एक बार जब मैंने झाँका
उसकी आँखों में
मुझे दिखे ,
हजारों रंग बिरंगे सपने
तितली से प्यारे
हाथ में बस्ता लिए
पढ़ने के सपने
डॉक्टर बनने के सपने
आधे - अधूरे हजारो सपने
काश ! भारत जल्द स्मार्ट देश बने
उस छोटी सी लड़की के लिए ।
Copyright@ Abhimanyu singh
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