तुम साथ हो तो संवरना अच्छा लगता हैं
तूफान कितने भी आये बस लड़ना अच्छा लगता हैं ।
पर हाथ आये रिश्वत तो खर्च करना अच्छा लगता हैं ।
सामने आये दुश्मन तो मरना अच्छा लगता हैं ।
पर , चाँद तो अंधेरों में ही अच्छा लगता हैं ।
ऐसी गुलामी में अब जीना अच्छा लगता हैं ।
जब से वो मिले है हमने पीना छोड़ दिया है ।
हमने कहा तेरे हाथ का सुखा निवाला अच्छा लगता हैं ।
पर वो तो तिरंगे में लिपटा ही अच्छा लगता है ।
बस अब तो ख्वाबों जीना ही अच्छा लगता हैं ।
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