गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

कुछ शेर

बारिश में पढ़ना बहुत अच्छा लगता हैं 
तुम साथ हो तो संवरना अच्छा लगता हैं

बिछड़ गए सपने जो उस रात हमने देखे थे ,
तूफान कितने भी आये बस लड़ना अच्छा लगता हैं ।

दिखने को तो हम भी बादशाह है ईमानदारी के 
पर हाथ आये रिश्वत तो खर्च करना अच्छा लगता हैं ।

कौन कहता हैं हमें रंजिशें पसंद नहीं , 
सामने आये दुश्मन तो मरना अच्छा लगता हैं ।

हर बार गिराया हमें अँधेरे बाजारों में 
पर , चाँद तो अंधेरों में  ही अच्छा लगता हैं ।

हम गुलाम बन गए एक दिन ईमानदारी के 
ऐसी गुलामी में अब जीना अच्छा लगता हैं ।

रातों में घूमना , बिसरना छोड़ दिया हैं 
जब से वो मिले है हमने पीना छोड़ दिया है ।

माँ हर रोज पूछती हैं , क्या खायेगा तूँ 
हमने कहा तेरे हाथ का सुखा निवाला अच्छा लगता हैं ।

बहिन राह तकती रही , भाई के लौट आने की
पर वो तो तिरंगे में लिपटा ही अच्छा लगता है ।

वो चले गए हमें छोड़ कर बीच रास्ते यूँ ही 
बस अब तो ख्वाबों जीना ही अच्छा लगता हैं ।

अभिमन्यु सिंह फैदानी ।

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